कैंसर की जांच और उपचार
कैंसर शब्द सुनना आसान नहीं होता। सही जानकारी और भरोसेमंद मेडिकल टीम प्रक्रिया को स्पष्ट बनाती है। कैंसर की पहचान आमतौर पर शारीरिक जांच और लैब टेस्ट से शुरू होती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर इमेजिंग टेस्ट करवाते हैं ताकि शरीर के अंदर की स्थिति देखी जा सके। बायोप्सी से कोशिकाओं की सटीक जांच होती है। उपचार हर मरीज के अनुसार तय किया जाता है। इसमें सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन, टार्गेटेड दवाएं, इम्यूनोथेरेपी, हार्मोन थेरेपी या बोन मैरो ट्रांसप्लांट शामिल हो सकते हैं। कुछ मामलों में क्लिनिकल ट्रायल भी विकल्प होता है। उद्देश्य बीमारी को हटाना या नियंत्रित करना और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखना है। अच्छी मेडिकल टीम हर विकल्प को सरल भाषा में समझाती है और हर चरण में साथ देती है।
कैंसर की जांच के तरीके
कैंसर की पुष्टि के लिए डॉक्टर एक या अधिक परीक्षणों का उपयोग कर सकते हैं:
शारीरिक परीक्षण: डॉक्टर शरीर में गांठ या असामान्य बदलाव की जांच करते हैं। त्वचा के रंग में परिवर्तन या किसी अंग के आकार में वृद्धि जैसे संकेत आगे की जांच की जरूरत बता सकते हैं।
लैब परीक्षण: खून और मूत्र की जांच से असामान्य परिणाम मिल सकते हैं जो कैंसर का संकेत देते हैं। उदाहरण के लिए, कम्प्लीट ब्लड काउंट में श्वेत रक्त कोशिकाओं की असामान्य संख्या दिखाई दे सकती है।

इमेजिंग टेस्ट: ये परीक्षण बिना सर्जरी के शरीर के अंदर की तस्वीर दिखाते हैं। सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, पीईटी स्कैन, एमआरआई, बोन स्कैन और एक्स रे आम तरीके हैं।
बायोप्सी: इस प्रक्रिया में संदिग्ध ऊतक का छोटा नमूना लिया जाता है और लैब में जांचा जाता है। कई प्रकार की बायोप्सी होती हैं। सही तरीका कैंसर के प्रकार और स्थिति पर निर्भर करता है। स्पष्ट निदान के लिए बायोप्सी अक्सर आवश्यक होती है।
लैब में विशेषज्ञ माइक्रोस्कोप से कोशिकाओं को देखते हैं। सामान्य कोशिकाएं समान आकार और व्यवस्थित ढंग से दिखाई देती हैं। कैंसर कोशिकाएं आकार और संरचना में असमान हो सकती हैं।
उपचार
कैंसर के उपचार के कई विकल्प उपलब्ध हैं। सही योजना कैंसर के प्रकार, चरण, मरीज की सेहत और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर निर्भर करती है। डॉक्टर और मरीज मिलकर लाभ और जोखिम पर चर्चा करते हैं। मुख्य लक्ष्य कैंसर को खत्म करना या अधिकतम नियंत्रित करना है।
कीमोथेरेपी: दवाओं के माध्यम से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।
रेडिएशन थेरेपी: उच्च ऊर्जा किरणों जैसे एक्स रे या प्रोटॉन से कैंसर कोशिकाओं को खत्म किया जाता है। यह शरीर के बाहर से या अंदरूनी स्रोत से दी जा सकती है।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट: बोन मैरो रक्त कोशिकाएं बनाता है। ट्रांसप्लांट में मरीज या दाता की कोशिकाओं का उपयोग किया जाता है। यह उच्च खुराक की कीमोथेरेपी के बाद स्वस्थ कोशिकाएं पुनर्स्थापित करने में मदद करता है।

इम्यूनोथेरेपी या बायोलॉजिकल थेरेपी: यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर से लड़ने के लिए सक्रिय करती है।
हार्मोन थेरेपी: कुछ कैंसर हार्मोन पर निर्भर होते हैं, जैसे स्तन और प्रोस्टेट कैंसर। यह थेरेपी उन हार्मोन के प्रभाव को कम करती है।
टार्गेटेड ड्रग थेरेपी: यह कैंसर कोशिकाओं की विशेष कमजोरियों को निशाना बनाती है।
क्लिनिकल ट्रायल: नए उपचार तरीकों की जांच के लिए शोध अध्ययन किए जाते हैं। कई ट्रायल वर्तमान में चल रहे हैं।
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